Monday, November 15, 2010

हाँ कभी आवारगी थी ज़िन्दगी की रौशनी ,
अब मगर ये ज़िन्दगी इक इम्तिहाँ होने लगी,

बेवफा आवारगी तारीकियों से डर गयी ,
शाम होते ही तलाश-ए-आशियाँ होने लगी  |

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haan kabhi aawargi thi zindagi ki roshni
ab magar ye zindagi ik imtihaan hone lagi

bewafa aawargi taarikiyon se dar gayi,
shaam hote hi talaash-e-aashiyaan hone lagi .

4 comments:

  1. मैं और मेरी आवारगी ......सुन्दर

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  2. बहुत ही सुन्‍दर पंक्तियां ।

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  3. बेवफा आवारगी...
    बहुत खूब

    http://veenakesur.blogspot.com/

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  4. भारतीय ब्लॉग लेखक मंच की तरफ से आप, आपके परिवार तथा इष्टमित्रो को होली की हार्दिक शुभकामना. यह मंच आपका स्वागत करता है, आप अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच

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